लक्ष्मन रेखा ~एकता नाहर

सीता के ‘न’ कहने पर
रावण ने तो नहीं किया एसिड अटैक
तो मेरे जिस्म पर ये घाव क्यों उभारे गए
मेरी छाती क्यों किसी रसायन ने समतल कर दी
ज़हर की गोलियाँ और बंदूक की गोलियाँ
करती हैं बराबर असर
फिर क्यों रसायन की बूँदों में क्षमता है
आत्मा को जला डालने की
कौन-सा ईश्वर तय करता है
कि किसके हिस्से में आनी चाहिए
कितनी सहनशक्ति
कि उसने मुझे चुना है
उम्र भर के इस दर्द के लिए
मेरी योनि में जब डाले गए शीशे के टुकड़े
बचे हुए टुकड़े ईश्वर ने सबकी आँखों में डाल दिए
ताकि मेरे अलावा कोई नहीं देख पाए मेरा दर्द
जब मेरे चेहरे/मेरी छाती पर फेंका गया एसिड
ईश्वर ने उसी एसिड से जला दिए सबके गले
ताकि मेरे अलावा
किसी के कंठ में नहीं रिस पाए रुदन
मैं अपने नन्हे पैरों से भागती कितना दूर तक
मेरे पैरों को तो सिर्फ़
कोमल और सुंदर जूते पहनने की आदत थी
मैं अपनी छोटी हथेलियों से क्या-क्या ढँकती
अपना चेहरा, अपनी छाती या अपनी आत्मा
मेरी हथेलियों को तो सिर्फ़
मुट्‌ठी में
चिड़िया का गुलाबी पंख छिपाने की आदत थी
वो जो सीता का ईश्वर है
क्या वो सीता के साथ ही धरती में समा गया
मैं तो छली गई हूँ मेरे ही ईश्वर से
सीता का तो फिर भी गुनाह था
लक्ष्मण रेखा पार करने का।

© एकता नाहर

किताब: सूली पर समाज

लेखक: Ravi Rajauli

परिचय: स्वतंत्र लेखक रवि राजौली का जन्म 25 जून 1995 को ग्राम- राजौली, तहसील- टोडाभीम, जिला- करौली, राजस्थान में हुआ। शिक्षा: कृषि संकाय में स्नातक, पूर्व छात्र बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ साथ आदिवासी समुदाय एवं कृषि क्षेत्र में शोध एवं लेखन। संपर्क: ईमेल- rvmeenabhu@gmail.com मोबाइल नंबर: 9414637672 व्हाट्स ऐप नंबर:9414837276 Twitter link- https://twitter.com/ravirajauli FB link- https://www.facebook.com/ravi.rajauli

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