दुःख । राजेंद्रदान देथा (पाँच कविताएँ)

(१)दु:ख

दुख की जड़ें गहरी होती है
बहुत गहरी,कुछ इस कदर कि
स्मृतियों के विस्मृत होने पर
गला भर जाता है एक बड़े ग्रास के
डूज सा ,सम्पूर्ण आकंठ तक
आखिर उलांकना नहीं जाना मैंने
मैं गटक जाता हूँ उन्हें
कतरते, कतरते!

(२)मैं मजदूर जो था

प्रेम,आंकाक्षाओं को
मैंने भी अपने पाले में चाहा
फिर यकायक
किसी उलझन
ने काज संपादन में
लगा दिया।
मैंने उक्त भर को
रख दिया दायीं जेब में
नीरव शांति के लिए,
और लग गया
अपने काम में
मुक्त हुआ काम से
तब ही संभाल
पाया था उन्हें
वे भीग चुके थे
बासी पसीने से
मैं “मजदूर” जो था
नहाना हर वक्त
मिरे जिम्मे न था

(३)वह प्रेम

मेरी चाहना है कि
अपना प्रेम विहीन हो
उन लाक्षणिक बिम्बों से जिनमें प्रयुक्त
होते है शाब्दिक अलंकार,
अलंकारों से आभूषण
उपमाएं, रूपक सब कुछ!
जिनमें उपयोग में आती है
प्रेमिल पहेलियां
जो इक दिन हो जानी है
“प्रतीत” सी
किसी विरान जहां में।
वैसे उक्त भर प्यार का प्रेमी
वह व्यक्ति होगा
जिसने कल्पना में डूबकर इश्क़ किया!
किताबों ने उसे कवि कहा!
सावधान रहना इनसे भी प्रिये!
ये बड़े खतरनाक होते है!

(४)रमता जोगी

निष्ठुर मानुष कभी नहीं थमा
वह कलकल बहता जाता है
समय की बहती धार में
अनेकों धारणाएं,प्रबुद्ध विचार
मिलते जाते है।
वह अपने स्वप्नों के शिखर पर
बैठाता हुआ
समय के सापेक्ष
फिरता रहता है
असीम अपेक्षाओं में।
अंततः वह इक दिन
आ ही बनता है
इस धरा पर।
फिर वह एक
अंधेरे कमरे में
खुद को ढूंढता
रहता है किसी
रमते जोगी कि भांति
और इसी सोच में रह बनता है कि
इक दिन उस “भले माणस” को
सोंपना ही है स्वयं को, क्यूं कष्ट दूँ
मुक्त रहूँ किसी फकीर सा!

(५)दीवार

यूँ तो दीवार मार्फत सुरक्षा बनी थी
मग़र रूपांतरण कुछ इस कदर हुआ की
यह दोनों भाइयों के बीच में
स्नेहिल प्रेम को विभाजित कर गयी।
माशूका के हृदयालिंदों को
विरक्त कर गयी।
वह औरत भी दीवार बन गयी थी
बूढ़ी मां और इकलौते लड़के के बीच
जिसने आते ही बड़ी
श्रद्धा से चरणों को दबाया था।
“वैसे इतिहास गवाह है
इक न इक दिन
जरूर ये दीवारें गूंज उठेंगी”
वाक्य बहुत सताता है।
उस एक दिन के इंतजार में
बीत जाएंगे
ऐसे ही कई दिन शायद!

राजेंद्रदान देथा

एक उत्तर दें

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s