बनिया | चरण सिंह पथिक

सफे कोरे ही रह गए जिन्हें दीवान होना था ।

तेरी हर अदा पर मुझे हैरान होना था ।
मैं आबाद हो गया मुझे वीरान होना था ।।

तू वो जमीं है जिस पै अदब के बीज बोये थे
मैं बनिया बन बैठा मुझे किसान होना था ।

जो गुजर गया वो ठीक था, जो आएगा वो देखेंगे
अब तू मुद्दा नहीं कोई ,तब परेशान होना था ।

कोई नहीं है यहाँ अमर, हैं चंद दिन हर जेब में
मुझे तो भक्त होना था, उन्हें भगवान होना था ।

बोझ दिल का अब हमारी पलकों पर उतरा
सफे कोरे ही रह गए जिन्हें दीवान होना था ।

भैरोघाट से

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