हिन्दी आलोचना के अपराध १. | कृष्ण कल्पित

‘हिन्दी आलोचना के अपराध’ नामक यह नया किताबचा आज से शुरू करता हूँ । इस श्रृंखला में हिन्दी आलोचना द्वारा किये गये नगण्य-जघण्य अपराधों को दर्ज़ किया जायेगा ताकि सनद रहे और वक़्त ज़रूरत काम आये ।

क्या आपने हिन्दी उपन्यासकार डॉ द्वारका प्रसाद का नाम सुना है ? अब पूरी तरह विस्मृत किये जा चुके डॉ द्वारका प्रसाद के 1970 के आसपास छपे पहले ही उपन्यास ‘घेरे के बाहर’ ने अपनी काम और कामेच्छाओं की सरहदों को छूती हुई मनोवैज्ञानिक कथावस्तु और बेलौस भाषा से तहलका मचा दिया था । यह ‘शेखर:एक जीवनी’ से बहुत आगे का मनोवैज्ञानिक गद्य था ।

द्वारका प्रसाद रातों-रात एक विवादास्पद और अश्लील लेखक के बतौर मशहूर हो गये । उस ज़माने में इस उपन्यास की प्रतियां किसी गुप्त दस्तावेज़ की तरह पढ़ी गईं । मेरी राय में ‘घेरे के बाहर’ से अधिक कोई बोल्ड उपन्यास हिन्दी में दूसरा नहीं लिखा गया ।

इस उपन्यास पर हिन्दीवादियों/शुचितावादियों/हिन्दूवादियों ने अश्लीलता का आरोप लगाया और किताब पर बैन लगाने के लिये राँची की कोर्ट में मुकदमा कर दिया । डॉ द्वारका प्रसाद राँची के ही थे । और किताब पर प्रतिबंध लग गया ।

इतनी महत्वपूर्ण और चर्चित कृति का हिन्दी के किसी बड़े आलोचक ने संज्ञान लिया हो याद नहीं पड़ता । न मार्क्सवादियों न अज्ञेयवादियों न आधुनिकतावादियों ने न उत्तर आधुनिकतावादियों और न राजेंद्रवादियों ने । जबकि मेरा मानना है कि ‘घेरे के बाहर’ हिन्दी उपन्यासों में एक अपनी तरह का माइल-स्टोन उपन्यास है ।

अब डॉ द्वारका प्रसाद की क्या ख़बर है कुछ पता नहीं । ‘घेरे के बाहर’ पर क्या अभी भी रोक है ? उपन्यास दिखाई नहीं देता । इसके बाद डॉ द्वारका प्रसाद ने ‘पहिये’ शीर्षक से एक और उपन्यास लिखा जो हिन्दी में उद्योगीकरण की प्रक्रिया पर प्रथम उपन्यास है । इसकी भी कहीं कोई चर्चा नहीं ।

लेकिन मेरा दावा है कि हिन्दी आलोचना डॉ द्वारका प्रसाद जैसे तिक्त और उर्वर बीज को पचा नहीं पायेगी । समय पाकर ‘घेरे के बाहर’ और ‘पहिये’ जैसे प्रयोगशील और महत्वपूर्ण उपन्यास अपनी जगह बनायेंगे और अपने जीवन-काल में उपेक्षित रहे डॉ द्वारका प्रसाद का आगामी समय में एक लेखक के रूप में महत्व होगा ।

क्या ही अच्छा हो कि हिन्दी का कोई कल्पनाशील प्रकाशक डॉ द्वारका प्रसाद के दोनों उपन्यासों को एक भूमिका के साथ एक ही ज़िल्द में प्रकाशित करे । ‘घेरे के बाहर’ अपने ज़माने का बेस्ट-सेलर था !

#हिन्दी_आलोचना_के_अपराध १. नया किताबचा.

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