कलयुग की नारी | राजेश नारौली-डांग

हाँ रे …
मैं तो डोलूँ रामा में, ढोला कु डयूटी भावे रे |
अरर , चित्तर-साड़ी में आँथा कू ,याद सतावे रे …..
ऐ जी तो ..प्राण न प्यारे बलम हजारी,लौट बगद घर कु आओ ।
6महिना हो गये ब्याब कू ,संग बैठ भोजन खाओ ।।
हल्दी से लरज गयो बदन पिया ,हाथाँ री मेहँदी सूख रही ।
हिवड़े में उठे हिलोर ,बसँत में कोयल प्यारी कूक रही ।।
फोनन पे समझाय ‘ प्रिये ;माँ-बाप से बढकर और नही ।
रात दिन्याँ कि ड्यूटी मेरी ,नार अकेली कू ठोर नही ।
हाँ रे ,कतई सबर कुन करूँ, बलम तू मत समझे हाँसी …
मईया बाप कू पटक कुँआ में ,लगा लऊँ फाँसी रे ….
मै तो डोलू रामा में ढोला…….(1)

ओडयाई पीड़ी लूगड़ी गींदौड़ी चाली ड्यूटी पे…,
अरर बूढा डोकरा की ,टाँग खलीती खूँटी पे ।।
सुन त्रिया के बोल बलम ,डयूटी छोड़ तुरत घर आयो ।
झटपट होय तैयार गींदौड़ी का रूप कू देख शशि शरमायो ।।
बिंदिया ललाट पेय शौभत है,नयनो में कजरा लुभाय रह्यो ।
लम्बा लटके केश ,चुटीला कणिया पे बल खाय रह्यो…
होठो पे लाली शौभत है ,कानो मे कुँडल चमक रहे ।
कट नगीना को चुड़ो भड़के ,पैरों में घुघरू खनक रहे ।।
हाँ जी..लहँगा मे परफ्यूम लगा लियो ,झल्लर जयपुर बाड़ी रे…
घुड़पैया को बैग घुड़क रियो ,सासू हो गयी काड़ी रे …
ओडयाई पीड़ी लूगड़ी गींदौड़ी चाली …….(2)

पँखा नीचे सोवे लौहड़ी ,डील बणा लियो वादी को …
कब्जो जाड़ीदार सिलायो ,नीकर (स्कर्ट) खादी को ।।
अरे गींदौड़ी कु आ गयी भारी मौज ।
खावे दाख बदाम करे होटल पे निस दिन भोज ।।
करे नहीं हेमा मालिन हौड ।
अर्दनग्न सा कपड़ा पहरे ,लहँगा लुगड़ी छोड़ ।।
मटाकी कु कतई शर्म नहीं आय ।
जीभ चटोकण होगी बाकी ,पिज्जा वर्गर खाय ।।
घर मे टी.वी. कूलर पँखा ,एसी गोवा की …
दे धमकी मशीन मँगा लयी कपड़ा धोवा की ।।
ऐ जी..खा खा हो रही लाल ,लगे जाणे हरियाणा कि झोटी रे….
कानन पे सु फोन हटे नहीं नीयत खोटी रे…
ओ पँखा नीचे सोवे लौहड़ी डील…………….(­3)

मैंने जाणी घरबाड़ी जाताँई लाड लडावेगी ….
या काँई ठीक पड़े पाछे सू खसम बुलावेगी …..
आगे सुणो कथा को हाल ,ध्यान दे लो सब मर्द लुगाई …..
सीधी साधी लगे गिंदौड़ी ,रूप बदल गी भाई ।।

ऐजी__
बलम डिलाइवर गाडी(ट्रेन) को घर तीन दिनाँ में आवे है।
खुद पे नहीं इतवार ,गींदौड़ी कु जीव सु ज्यादा चाहवे है ।।
ग्यानी ध्यानी सब हारे ,कहुँ भेद नार को ना पावे है ।
चित से है चित चोर गीदौड़ी ,सबको मन ललचावे है ।।
ड्युटी पे बगद जब जाय बलम , फिर त्रिया चरित्र रचावे है ।
दे मिसकाँल बुलाय ,यार सँग रँगरलियाँ मनावे ।।
पल पल कि राखे खबर ,फोन कर देवे ढोला कू ।।
पिक्चर हाँल में फिंल्म दिखावे ,वा मिठबोला कू ।।

ऐजी तो ___
फूटा कर्म फकीर का तो ,कोई भरी चिलम ढुल जाय ।
नम्बर कटगो ड्युटी सु वा ऊलटो ही मुड़ आय रे ….
मैने जाणी घरबाड़ी….
हाँ रे ,घर मे घुसगो मीठबोला ,पीछे सु मजा उडावे रे …..
अरर लौहड़ी माल परायो खावे डील बणावे रे …..
बलम जब घर के भीतर आयो…
देख हाल त्रिया को ढोला मन में बहुत लजायो ।।
बदन में गुस्सो भर आवे …
और पकड़ टाँग जब देय पछाड़ो ,सैंदो भूसट खावे ।।
ढड़क रहे नयन न सु आँसू….
दाँत टूट गया मिठबोला का ,टूटी दो पाँसू ।।
गजब की मार लगायी भाया में….
गोडा लकड़ी लगा, बाँध दियो तरूवर छाया में ।।
अरे गिंदौंड़ी निकड़ी घणी होशियार…
कर दियो टेलिफोन बुला लिया मिठबोला का यार ।।
फँदो फँसगो बातन को ….
ढोला कु मरवार ,फोड़ दियो चूड़ो हाथ न को ।।
हाँ जी तो ____हँसो उडगो काया से, उडायो घरबाड़ी ने……….
सैंदो भायेली संग झाँके बारह ताणी में रे…
घर में घुसगो मिठबोला पीछे सु मजा…….

(पिछले दिनों अपने अवैध सम्बन्धो की बजह से अपने बेटे को मारने और पति पर दहेज का झूँठा मुकदमा दर्ज कराने की खबर पढ़ी तो दिल काँप उठा..ऐसी ही एक सच्ची घटना पर आधारित पद रचना आपके समक्ष प्रस्तुत है…
नोट- पात्र काल्पनिक है गाँव और नाम गोपनीय रखे गए है )

एक उत्तर दें

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s