दुआड़ी पाछे | राजेश नारौली-डांग

हाँ रे …
रोवे मत लाडले , मम्मी की ममता भर दीज्यो ।
चोखो पढ ज्यो,अफसर बणज्यो, मान बढ़ा दीज्यो ।।
हाँ रे …
लड्डू ले जा देशी का पढ़वा में जीव् लगा दीज्यो।
रोटी न्ह होवे जब थोड़ा थोड़ा खा लीज्यो ।।
हाँ रे …
थारो बाबुल करे मंजूरी , झुर्री पड़गी गाल न में।
तू तो पढ लीज्यो मत आ ज्यो कोई की चाल न में ।।
हाँ रे…
मत ज्याजो बीयर बारन में ,मत झगड़ा में पड़ज्याजो रे।
कोई की छोरी सु मत गैर लब्ज बतड़ाज्यो रे।।
हाँ रे …

हाँ रे …
घणा दिनां में आयो राइबर छोड़ अकेली मत जावे ।
तो बिन कांचन का बंगला में ,मन को लागे ।।

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