केदारनाथ सिंह | पुण्यतिथि

(1) नाम

नाम कमाने की धुन में

जब यहाँ तक आया

तो अचानक पाया

कि हर नाम एक घोंसला है

जिसमें कोई चिड़िया अंडा नहीं देती ।

(2) हाथ

उसका हाथ

अपने हाथ में लेते हुए मैंने सोचा

दुनिया को

हाथ की तरह गरम और सुन्दर होना चाहिए ।

(3) जाना

मैं जा रही हूँ-उसने कहा

जाओ- मैंने उत्तर दिया

यह जानते हुए कि

जाना हिन्दी की सबसे ख़ौफ़नाक

क्रिया है ।

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