लॉक डाउन | चरण सिंह ‘पथिक’

तुझपे तो असर है दरिया की रवानी का ।
मेरे सर इल्जाम है इश्क-बयानी का ।।

दिन हैं सहमे-सहमे शामें भी उदास हैं
पर रात आई तो खत आया रात-रानी का ।

ख्बाव में ही सही हम तुमसे पूछेंगे जरूर
दर्द कम हुआ है या मर्ज बढ़ गया दीवानी का ।

गरूर ना हुश्न पै करियो ना कातिल अदाओं पै
जिंदगानी तो फकत बुलबुला है पानी का ।

ये मुमकिन नहीं कि तू भुला दे पथिक को
एक नया किरदार है तू नई कहानी का ।

भैरोघाट से

पेंटिंग पथिक की वाल से , साभार

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