टूटना और डूबना यादृच्छिक हैं कि नियंत्रित कहना कठिन है – आलोक रंजन

टूटना और डूबना

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Photograph – Omesh
दूर कहीं एक पुल टूटा है
वहीँ एक सूरज भी डूबा है
टूटना और डूबना यादृच्छिक हैं कि
नियंत्रित
कहना कठिन है …
कहीं इसका भी विज्ञान हो जो यह तय करे
वैसे ही जैसे मांसपेशियाँ तय हैं …
बहरहाल
डूबते सूरज को देखने लोग गए थे
स्थानीय लोग टूटे हुए पुल को भी घेर कर खड़े थे
जैसे पुल एक चोटिल अपराधी हो और दर्द निजाते ही भाग जायेगा …
न पुल टूटने का कोई प्रभाव है या रहेगा
न ही सूरज के डूबने का …
पुल पुराना था
अपनी इस गत का इंतज़ार करता
उस के ऊपर ही वह पुल था
जिसने बहुत पहले ही एहसास दिला दिया था कि
-म्यां दिन पूरे हुए …
और सूरज ?
अरे भई वह तो कल भी निकलेगा …

अभी
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Photograph – Omesh
अभी
मेरे शब्द हैं मेरे पास
जिनमें भाव हैं और अर्थ भी
इनमें संदर्भ नहीं हैं
मैं लिख जरूर देता हूँ
प्यार , आसमान , मुस्कान और चाँद
लेकिन
तुमसे अलग रहकर
वे खड़े नहीं रहते
संदर्भ को मैं
नींव मानता हूँ
हम दोनों की ,
कविता की
मैं तुम्हारे प्यार को
सात आसमान कह देता हूँ
तुम्हारी मुस्कान
बन उठता है चाँद
तो शब्दों के अर्थ भी
पिघल जाते हैं
नहीं पिघलता है तो
बस तुम्हारा मन ….
तुम्हारा मन
मेरे शब्दों का संदर्भ है
आलंबन है भावों का
और आश्रय मेरा ..
अब इसे ठीक उसी तरह देखो
जैसी कि यह दशा है
तो रंग के भंग हो जाने की टीस
तुम्हें भी महसूस होगी ….

तुम्हारे ही नाम
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Photograph – Omesh
वे खयाल भी खूब हैं
जो , खुल के आते हैं
तुम्हें देखकर …
पर वे खयाल ही हैं
जिनकी खामोशी से लेकर शोर तक में
अपने को और भी उलझा हुआ पाना
मेरे होने की पहचान है …
यह आत्म वक्तव्य है
जिसमें अपने को
तुमसे न कह पाने की
चयनित विवशता के
चक्र दर चक्र चले निशानों का जाल है !
हाँ जब जब यह पता चलता है
कि तस्वीरों से इंसान नहीं निकल आते
तब तब तुम्हारी अगली तस्वीर खोज लाता हूँ…
खोने पाने के निश्चित क्रम में
खोना ज्यादा भारी रहा
सो बार बार खोते और हारते हुए भी
नए सिरे से तुम्हें देखना
नई ऊर्जा देता है !

केवल प्यार ही करना जरूरी नहीं है
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Photograph – Omesh
कोई केवल
यह कह कर काम नहीं चला सकता
कि ,
मैं तुमसे प्यार करता हूँ
प्यार के लिए
प्यार होते दिखना
बहुत जरूरी है
वह दिखना कई तरह से हो सकता है
हो सकता है कि
प्यार ही ऐसी चीज हो
जिसपर
आपके प्रेमी का सबकुछ टिका हो
मौका आने पर
सबसे पहले
जब वही आधार टूट जाए
तो कोई भी समझ सकता है
कि
खून के आँसू कैसे होते हैं
इसके बावजूद
प्यार एक ऐसी क्रिया है
जिसमें दो लोग होते हैं
दोनों ही महत्वपूर्ण
कोई भी रिश्ता
समय के साथ
अपने रंग छोड़ता जाता है
फिर प्यार क्या चीज है
ऐसे में
प्यार से भाग जाना
व्यक्तिगत सफलता जरूर लगती है
कुछ कुछ आजादी की तरह भी
लेकिन
यह उस बंधन की हार होती है
जो दो लोग प्रेम में पड़ते ही बांध लेते हैं
और
अपमान उस भाव का जिसे प्यार कहते हैं …
इसलिए प्यार का टूटना तोड़ देता है …
बढ़ा देता है मन के भीतर बहुत कुछ
जो सुंदर नहीं हो
जो किसी हद तक भेद दे मन को ,
खुद को …

रचनाकार – आलोक रंजन

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