अथाई का भाव

Be yourself; Everyone else is already taken.

— Oscar Wilde.

गाँवों में अथाई एक ऐसी जगह होती है, जहाँ बारात आकर रूकती है, दूल्हे का पहला आगमन वहीं होता है। दोनों गाँवों के बड़े-बुज़ुर्ग यहीं पहली बार मिलते हैं।

आम दिनों में भी अथाई गाँव का सांस्कृतिक केंद्र है, जहाँ फ़ुर्सत के पलों को जिया जाता है। कुछ लोग अपने हुनर का इस्तेमाल करते हुए दोपहरी काटते हैं।और उपयोगी चीज़ें बुनते हैं।

एक बूढ़े पीपल के चारों और बना चबूतरा अथाई है।

बाहर से कोई नेता या कलाकार या सम्मानित व्यक्ति आता है तो भी इसी मंच पर उसका स्वागत किया जाता है, सम्वाद होता है।

लोक गीतों और नृत्यों के कार्यक्रमों का भी यह मंच है।

विषाद-उल्लास, नृत्य-गीत, रस्म-रिवाज़ अथाई से जुड़े हैं।