सुल्फी यार | अमित ओहलान

उपन्यास अंश

गरीब चोर (उम्र का अंदाज़ा नहीं)
काली एसयूवी गाड़ी (रजिस्ट्रेशन नंबर की जगह काली पट्टी)
सुल्फे से भरी दो व एक सादी सिगरेट –
किसी के बारे में जानकारी हासिल करना कैसा है? क्या उस जानकारी का इस्तेमाल किसी बुरे काम के लिए करना आसान है? लेकिन किसी के बारे में जान लेना आसान काम नहीं है. तेज़ चलती लड़की के बारे में मुझे क्या जानकारी थी? वह अलगअलग रंगों की पोलो टीशर्ट और हमेशा फीकी नीली जीन्स पहनती है. वह हमेशा गुलाबी झलक वाले स्पोर्ट्स जूते पहन कर सड़क पर आती या जाती दिखाई देती है. मैंने सवाल किया – वह कौन है? कोई जवाब नहीं मिला. कौन उसकी जानकारी दे सकता था? इसकी जानकारी मुझे नशेड़ी दुधिया से मिली. मेरे गाँव हमेशा थका-सा रहने वाला दुधिया, जो किसी दुधिया जैसा लगने की बजाय मरियल मजदूर जैसा लग रहा था – वह रो रहा था. मैंने उसे खेतों के रास्ते में सड़क किनारे रद्द पड़ी फैक्ट्री के पास देखा. उसकी मोटरसाइकिल थोबड़ा उठाये पड़ी थी और दूध के ड्राम उलट-पुलट गए थे. दूध दिवार के पास पड़ी राख और मिट्टी पर बिखरता चला गया था. वहां खेतों में दौड़ती रहने वाली लंबोतरी कुतिया ड्राम के पतले मुहं में जीभ घुसाए दूध सुड़क रही थी. खेत से घर की ओर आते हुए मैंने देखा – लंबोतरी कुत्तिया की पूंछ हिल रही है, फिर काँपता हुआ दुधिया रो रहा है. सोचा – क्या इसका एक्सीडेंट हो गया है? माहौल देखकर मुझे अपनी मोटरसाइकिल रोकनी पड़ी. उसके घुटने और हथेलियाँ छील गए थे. मेरी समझ में नहीं आया कि बात कहाँ से शुरू करें. मैं उसके दर्द से जुड़ नहीं पाया और सांत्वना के शब्द भीतर ही मर गए. वह मेरी ओर देखने की बजाय बीड़ी खींचता हुआ रोता रहा. कोई दुधिया किसी रद्द पड़ी फैक्ट्री की दिवार के सहारे लगकर कैसे रो सकता है? मैंने कारण पूछा –
उसने बताया – “मेरी औरत ने मेरा फ़ोन हैक करवा रखा है.”
“क्यो?” मैंने सोचा – कोई ऐसा क्यूँ करेगा?
“वह मेरे फ़ोन से इन्टरनेट के जरिये किसी को भी गंदे-गंदे मेसेज भेजती है.” दुधिया बता रहा था – “वह मुझे बदनाम करना चाहती है.”
“क्यों?” – मैंने सोचा – किसी को बदनाम करने से क्या मिलता है?
दुधिया सुबकता हुआ बोला – “वह मुझसे छुटकारा चाहती है.”
“क्यों?” सोचा – कोई किसी से छुटकारा क्यूँ चाहता है?
“वह किसी पुलिस वाले के साथ प्रेम में है?” उसने आधी इस्तेमाल हुई बीड़ी फेंक दी और लंबोतरी कुतिया को देखने लगा. क्या वह नुकसान का जायजा ले रहा था? वहां चार ड्राम थे और चारों के ढक्कन खुले थे. मैं उससे दूध की मात्रा के बारे में पूछना चाहता था.
उसने बताया – “बीस लिटर प्रति ड्राम.” फिर कुछ सोचा और कहा – “एक तो खाली था.”
लंबोतरी कुतिया ने कितना सुड़क लिया होगा?
“अरे भाई!” दुधिया लगभग चिल्लाया – “कितना बड़ा पेट है इसका और कितना पीयेगी! तुम्हें कुतिया और दूध की पड़ी है. उस औरत ने मेरी ऐसी तैसी कर रखी है. वह मुझे मार के छोड़ेगी.”
उसकी औरत किसी पुलिस वाले के प्रेम में कैसे उलझी? जबकि दुधिया की प्रेम कहानी गाँव में मशहूर हुई थी. दुधिया बनने से पहले वह बस में लटककर कॉलेज जाता था. कॉलेज जाते हुए उसे एक लड़की से प्रेम हुआ. वह लड़की इसके साथ कहीं भाग गयी. फिर उन्होंने कहीं किसी मंदिर में शादी कर ली. फिर वे गाँव में आ गए. थोड़ी ना नुकुर और दो चार पंचायतों के बाद घरवाले मान गए लेकिन अब उसकी कहानी में नया मोड़ आ पहुंचा. ये कैसे हुआ? दुधिया ने बताया – “वह मेरी पिटाई करवा सकती है, मेरा क़त्ल करवा सकती है, केस कर सकती है और पता नहीं क्या क्या कर सकती है.” वह रोते हुए बता रहा था – “भाई पिछले दो महीने में उसने मेरी मोटरसाइकिल के दस चालान कटवा दिए हैं.”
“दस चालान!”
“हाँ”
“फिर तुम कुछ करते क्यों नहीं?”
“मैंने पंचायत की थी. पंचातियों को फ़ोन हैकिंग समझ नहीं आई.” उसने मुझे सवाल किया – “छोटे भाई! ये पंचायती इतने मुर्ख कैसे हो जाते हैं?”
उसने मेरे जवाब की प्रतीक्षा नहीं की और कपड़े झाड़ने लगा. वह उठा और सड़क पर चल दिया जैसे उसे उम्रभर यूँही चलते रहना है. मुझे उसके लिए अफ़सोस हुआ. प्रेम और प्रेम की साजिशों में तकनीक का इस्तेमाल हो रहा था. होना तो यह चाहिए था कि मैं नशेड़ी दूधिया को कोई सलाह या कम से कम सांत्वना ही देता, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. मैंने लंबोतरी कुतिया, दूध और दूधिये से आगे देखना शुरू कर दिया.
हुआ यह कि मैं मोबाइल फ़ोन हैकरों की खोजबीन करने लगा. करीबन एक महिना खोजने के बाद एक ‘गरीब चोर’ मिला. ‘गरीब चोर’ – उसने इन्टरनेट पर यही नाम दिया था. ‘गरीब चोर’ ने चैट करते हुए बताया कि – “मैं अपने इलाके का सबसे खतरनाक हैकर हूँ. पुलिस वाले तक मेरी मदद लेते हैं. लड़कियों के भाई और प्रेमी, लड़कियां अपने प्रेमियों, कंपनी अपने ग्राहकों पर चोर नज़र रखने के लिए मेरी सेवाएं लेती हैं. मैं ‘गरीब चोर’ आपकी क्या मदद कर सकता हूँ?”
एक हैकर जिसका स्क्रीन नाम ‘गरीब चोर’ है मेरी क्या मदद कर सकता था? क्या वह तेज़ चलती लड़की का फ़ोन हैक कर सकता था?
“उसके लिए लड़की का फ़ोन भी चाहिए”
“अच्छा!”
मेरे पास लड़की का फ़ोन नहीं था. मैंने उसे अपनी दिक्कत बताई. कुछ देर चैट विंडो शांत रही. उसने कुछ देर इंतज़ार करने के बाद उत्तर दिया – ‘मैं तुम्हारी सहायता करूँगा.’
वह मुझे दो नहरों के बीच वाली सड़क पर मिला. ‘गरीब चोर’ काले रंग की एसयूवी गाड़ी में पहुंचा. उसकी गाड़ी से धुआं जाल बनाता हुआ निकल रहा था. मैंने सोचा – वह गाड़ी से नीचे उतरेगा और हाथ मिलाएगा. वह पैसे की बात करेगा और तेरा काम हो जाएगा कह कर चलता बनेगा. लेकिन उसने मुझे ही इशारे से गाड़ी के भीतर बुला लिया. मैं उसकी गाड़ी में बैठ गया. उसकी गाड़ी, गाड़ी के रिम और शीशे, सीट और डैशबोर्ड सब काले थे. लेकिन हैकर का रंग सांवला-सा ही था. उसने दायें-बायें, आगे-पीछे देखा और पूछा – “तुम किसके साथ आए हो?” मैंने बताया – “मैं अकेला आया हूँ.” उसने पूछा – “कैसे आए हो?” मैंने बताया – “बस से आया हूँ.” वह बोला – “हाँ यही ठीक रहता.” उसने काली डरावनी और विशालकाय गाड़ी को गियर में डाला और हम नहरों की बीच की सड़क पर आगे बढ़ गए. हम इतना आगे बढ़ गए कि मुख्य सड़क बहुत पीछे रह गयी. उसने एक सुरक्षित जगह देखकर ब्रेक लगाये. वहां दोनों नहरों के बीच से निकली सड़क पर शहतूत के पेड़ थे. उसने एक पेड़ के नीचे गाड़ी बंद की और पूछा –
“तुम्हें किसी की भी जानकारी क्यों चाहिए? क्या ये सही है?” उसने कान से बिना फ़िल्टर की सफ़ेद सिगरेट उतारी और उसमें से तम्बाकू निकालने लगा.
‘गरीब चोर’ नैतिकता से जुड़े सवाल क्यों पूछ रहा था? क्या वह एक नैतिक हैकर था? अगर वह हर प्रेमी और कंपनी से यही सवाल पूछता है तो उसका काम कैसे चलता होगा? सोचा – क्या वह पुलिस से भी यही सवाल पूछता है?
“नहीं.” वह कहने लगा – “तुम थोड़े अजीब लगे. ऐसा लगा कि तुम्हें उस लड़की की नहीं बल्कि खुद की जानकारी चाहिए.”
“नहीं भाई मुझे उसी की जानकारी चाहिए.”
“क्यों?” – वह अब भी तम्बाकू निकाल रहा था.
“क्योंकि मैं उसे जानता नहीं हूँ.”
“क्यों जानना चाहते हो?” उसने तम्बाकू को हथेली पर रखा और उसे जांचने लगा. वह सूक्ष्मता से तम्बाकू को जांच रहा था. उसने खाली सिगरेट को डेश बोर्ड पर रख दिया फिर कुछ सोचा और उठाकर खिड़की से बाहर फेंक दिया.
मुझे लगा वह मेरी ओर से उदासीन है. उसका ध्यान खींचने के लिए मैंने कहा – “क्योंकि मैं उसके बारे में जानना चाहता हूँ. मुझे ऐसा लग रहा है कि मुझे उसके बारे में जानना चहिये. शायद वह मुझे अच्छी लगती है.”
“अच्छा!” वह कोई पुख्ता वजह जानना चाहता था.
मेरे पास पुख्ता वजह नहीं थी. मैं ‘गरीब चोर’ को ही जांचने लगा. वह अजीब आदमी था. उसने गियर बॉक्स के पास से एक डिब्बी उठाई. शीशे में देखा. फिर पीछे मुड़कर देखा. वह आश्वस्त होना चाहता था कि कोई उसे देख न रहा हो. उसे मेरे अलावा कोई नहीं देख रहा था.
“तुम बर्बाद आदमी हो.” उसने कहा और डिब्बी खोलने लगा.
“इसका क्या मतलब है?”
“शायद तुम उसके बारे में कुछ नहीं जान सकते.” वह डिब्बी को नाक के पास ले गया, सुंघा और मुस्कुराने लगा. उसकी दिलचस्पी मेरी मदद करने की बजाय डिब्बी में ही थी.
“अरे ऐसा नहीं है.” वह अचानक से बोल उठा – “यह माल वह नहीं है जो मुझे चाहिए. पता नहीं साला ये लोग नकली माल क्यों देते हैं? हरामजादे! पैसे के भूखे!” वह कुछ क्षण झल्लाया हुआ-सा बैठा रहा फिर कहने लगा – “तुम्हारी मदद तो मैं कर सकता हूँ लेकिन मुझे कुछ शुरूआती जानकारी तो दो.”
मैं बात शुरू करने ही वाला था कि उसने टोका – “रुको!” मैं शुरू करने से पहले रुक गया और उसे देखने लगा. उसने खिड़की खोली और पीछे की तरफ गया. उसने गाड़ी का सबसे पिछ्ला दरवाजा खोला, फिर बैग खोलने की आवाज़ आई. जब वह वापस ड्राइविंग सीट पर आया तब उसके पास एक नयी डिब्बी थी. उसने डिब्बी खोली, नाक के पास ले गया और मुझे कहा – “हाँ अब ठीक है. तुम आगे बताओ.”
मैंने बताया – “वह कई बार शाम छ बजे के आसपास स्टेशन के भीतर पहुँचती है. वह सुबह साढ़े नौ से दस बजे के आसपास आती है. वह हमेशा ही पोलो टीशर्ट और ब्लू जीन्स पहनती है. वह गुलाबी झलक वाले स्पोर्ट्स जूते पहनती है.”
“क्या वह गुलाबी झलक वाले स्पोर्ट्स जूते पहनती है?”
“हाँ”
“हम्म्म. क्या वह हर रोज स्टेशन के अन्दर जाती है?”
“नहीं.” मैंने बताया – “वह कई बार दूसरी सड़कों की ओर भी मुड़ जाती है. वह कई बार चौक पर खड़ी मिली है. एक बार वह मोटरसाइकिल पर थी.”
वह हैरान हो गया “क्या वह मोटरसाइकिल चलाती है?”
“हाँ.” वह कुछ और जानकारी चाहता था. मैंने जानकारी दी – “वह 350 सीसी पुराने किस्म की भारी भरकम मोटरसाइकिल दौड़ाते हुई दिखी थी. उलटे साइड गियर वाली उसकी मोटरसाइकिल का रंग काला था. ”
“अच्छा!” वह अब भी हैरान था, उसने स्टेरिंग पर हाथ मारा और मेरी और देखने लगा. वह मुस्कुराया और कहने लगा – “लेकिन तुम यह नहीं जानते कि वह सोचती क्या है?”
वह किसी हैकर जैसा बिलकुल भी नहीं मिला. सांवले रंग का उसका चेहरा बेहद पिचका हुआ था. किसी फौजी की तरह उसके बाल बेहद छोटे कटे थे. उसने सफ़ेद कुरता पायजामा पहन रखा था, कुरते की ऊपर वाली जेब में नीले और लाल ढक्कन वाले दो पैन टंगे थे. उसने गले में सोने की बेहद मोटी चेन डाल रखी थी. उसके जूते दिखायी नहीं दिए लेकिन मुझे यकीन था कि उसने सफ़ेद जूते पहने होंगे. वह किसी प्रॉपर्टी डीलर जैसा था. उसकी गाड़ी, कुरता पायजामा और सोने की चेन इसकी गवाही दे रही थी.
“देख भाई! तुम मुझे काफी नादान लगे लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुम उस लड़की जानकरी नहीं ले सकते. उसमें अभी काफी वक़्त लगेगा.” वह चुप हुआ फिर कहा – “सुनो! मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ.”
“कहानी?”
“हाँ कहानी. क्योंकि तुम उलझन में हो इसीलिए कहानी सुनो. जब हम बर्बाद हालत में आ जाएँ तब हमें दूसरों की कहानी जाननी चाहिए. कहानियों का यही मतलब है.”
“तुम मुझे बर्बाद क्यों कह रहे हो.”
उसने कुछ क्षण मुझे देखते हुए डिब्बी से जरा सा सामान निकाला. उसने निकाले गए सामान को हथेली पर रखा और सिगरेट से निकाले तम्बाकू में मिलानी शुरू कर दिया. अब वह मेरी ओर से शून्य होकर घालमेल करने में मशगुल हो गया था. काफी देर हथेली पर रगड़ने और फूंकने के बाद उसने एक सफ़ेद कागज़ लिया. उसमें ‘माल’ को रखा और गोल गोल घुमाकर सिगरेट बनाने लगा. एक देसी सिगरेट तैयार कर ली गयी. उसने गाड़ी के सॉकेट से लाइटर निकाला और सिगरेट जला ली. सफ़ेद गाढ़ा धुआं गाड़ी में भरने लगा. मुझे लगा – शीशा नीचे कर दूँ. लेकीन उसने मना कर दिया. दो नहरों के बीच में सुल्फा भरी सिगरेट पीते हुए कौन आदमी कहानी सुनाता है? दो घूंट खींचने के बाद ‘गरीब चोर’ के चेहरे पर तृप्ति छाने लगी थी. अब वह मुझे कहानी सुना सकता था. उसने कहानी सुनाई –
“मैं तुम्हें नहीं जानता. लेकिन मैं इंसानों को सूंघ सकता हूँ. इससे मुझे उनकी हालत की जानकारी हो जाती है. अब कहानी सुनो – एक लड़का जिसे उसके दोस्त मूर्ख कहते थे उसके पास एक पिल्ला था. यह उसी नन्हें पिल्ले की कहानी है. मूर्ख का पिल्ला जो अपने मालिक जितना ही दिमाग रखता था उसने एक कातिल बन्दर को देखा. कातिल बन्दर ने एक नन्हें बिलोटने की गर्दन मरोड़ कर हत्या कर दी. इससे पिल्ला सदमें में पहुँच गया. पिल्ला सदमें में पहुँच गया यह देख उसके मालिक नें हल्ला कर दिया. यहाँ कुत्ते और इंसान के दिमाग ने अलग अलग तरह से प्रतिक्रिया दी. क्योंकि वे दोनों ही गरीब थे इसीलिए किसी ने उनको मनोवैज्ञानिक के पास ले जाने की जहमत नहीं उठाई. वह मूर्ख छोटे से खेत में गाजर उखाड़ता रहा और पिल्ला धुंध के पार आसमान में बिलोटने की आँखें खोजता रहा. वे दोनों एक दुसरे से छिटक गए और दूर दूर रहने लगे. पिल्ला चूहे खाना सीख गया और उसका मालिक बीड़ी सुलगाकर कातिल बनने के बहाने खोजने लगा. एक दिन उसने क़त्ल किया. अरे नहीं मेरे भाई! नन्हें पिल्ले का नहीं. उसने एक चिड़िया का कत्ल किया था. वह चिड़िया उसकी चीखों में प्रेम के सूर लगा रही थी. ऐसा हो नहीं सकता. यह शोर और परेशानी से हो रही बर्बादी के खिलाफ जा रहा मामला था. वह मारी गयी. कल्पना करो कोई इंसान किसी चिड़िया को कैसे मार सकता है? पिल्ले ने छोटी चिड़िया की लाश को गाजर के खेत से बाहर खींचा. वह उसे मेंढ़ पर रखना चाहता था. वह देखना चाहता था कि क्या चिड़िया की आँखों में बिलोटने की कोई आहट है. लेकिन यह चाहत पृथकता के नियम की अवेहलना करती है. पिल्ला जो अपने मालिक जितना दिमाग रखता था, समझ गया कि चिड़िया की आँखें गर्दन मरोड़ने से बाहर निकल गयी हैं. चिड़िया की चीख मिट्टी के भीतर गाजर की अंतिम नोक से भी नीचे चूहों के महलों के तले अनंत गहराइयों में दब गयी हैं. उसने यह भी समझा कि मेरा दोस्त मेरा मालिक मुझसे अलग है. उसने अंदाजा लगाया कि बन्दर और उसके मालिक में बीड़ी सुलगाने का ही फर्क है. वह खाने की जरूरत से अलग सिर्फ इसलिए भी किसी की हत्या कर सकता है क्योंकि वह चीखों को प्रेम लहरियों से अलग रखना चाहता है. क्या ऐसे मुर्ख के साथ रहने का कोई फायदा है? सोचो! दो घूंट के धुंए से तुम्हारी ऐसी तैसी हो गयी तो उस बेचारे पिल्ले के साथ क्या होता होगा जो हर वक़्त किसी बीड़ी पीने वाले के साथ रहता था. बीड़ी पीने वाला उसका मालिक हर वक़्त बीड़ी या हुक्का पी रहा होता था. ट्रेक्टर पर बैठ कर, आम के पेड़ के नीचे लेटे हुए, राह चलते यहाँ तक कि शौच के लिए उकड़ू बैठे हुए वह बीड़ी सुलगा लेता. जब वह बीड़ी नहीं पीता था तब वह हुक्का गुड़गुड़ाने लगता. इसीलिए पिल्ले ने मुर्ख से अपनी जान बचायी और उसके खेत से भाग निकला.”
कहानी सुनाकर वह सुन्न–सा हो गया. उसने आँखें बंद कर ली और सीट को पीछे कर के लेट गया. उसके दायें हाथ में अब भी देसी सिगरेट जल रही थी. मुझे पूरी उम्मीद हो गयी कि वह नशे में सो जाएगा. उसे जगाना पड़ा –
“तुमने यही कहानी क्यों सुनाई.”
वह झटके से उठ बैठा और जवाब दिया – “मैंने तुम्हें यह कहानी इसलिए सुनाई क्योंकि एक दिन सभी पिल्ले या तो इंसान को छोड़ देंगे या इंसान बन जायेंगे.”
“हैकर ऐसी कहानी नहीं सुनाते.”
“पिल्ले भी तो इंसान को छोड़ कर नहीं जाते?” – वह किसी दार्शनिक की तरह गाड़ी की छत को घूरने लगा था. गाड़ी की छत भी काली थी. “लेकिन हमारी चीख अनंत हो चली हैं इसीलिए कुछ भी हो सकता है.” – वह अब भी छत की ओर देख रहा था.
“क्या तुम मूर्ख मालिक हो?”अब मैं उसके मजे लेना चाहता था.
“नहीं मैं पिल्ला हूँ.” – उसने छत को छोड़ मुझे घूरना शुरू कर दिया. मैंने देखा – उसकी आँखों में हल्का सा लाल रंग है. क्या यह नशे के कारण था? मैं उसके चेहरे में कुत्ता खोजना चाहता था लेकिन वह सिर्फ इंसान ही रहा. मैं उसकी बात को हंसी में उड़ा देना चाहता था लेकिन उसने जोर देकर बताया –
“मैं ही वह पिल्ला हूँ जो अपने मालिक को खेत में छोड़ कर फरार हो गया.”
क्या काले चिपचिपे सुल्फे का असर शुरू हो गया था? यह कैसे विश्वास किया जा सकता है कि प्रॉपर्टी डीलर जैसा दिखने वाला वह कम्पुटर हैकर किसी जमाने में पिल्ला था. कैसे वह कुत्ते से इंसान में तब्दील हो गया? क्या कोई इंसान कभी कुत्ते में तब्दील हुआ है? मैं उस नक्शे को खोजना चाहता था जहाँ से पिल्ले की यात्रा के तमाम पड़ाव पाए जा सकें. वह जब खेत छोड़ काली सड़क पर निकला – तब कहाँ कहाँ गया? मैं उससे सवाल करना चाहता था क्यों वह एक उदास इंसान बना.
क्यों वह उदास इंसान बना?
“मैं उदास इंसान नहीं हूँ.” नशे से थका हुआ उसका चेहरा बेहद उदास हो गया था. लेकिन उसने बताया – “इंसान उदास नहीं होते. वे उदास होने का अभिनय करते हैं. वे दरअसल सड़े हुए पानी तरह होते हैं.”
“इन्सान सड़े हुए पानी की तरह कैसे हो सकते हैं?”
“मुझे अपने आरोप पर सफाई देने की जरूरत नहीं है. मैं तुम्हें जवाब देने की संभावनाओं से आगे निकल गया हूँ.” उसने झटके से सीट आगे खींच ली और सफाई देने लगा – “वैसे भी मुझे इंसानों के लिए सफाई देने की कोई जरूरत नहीं है.”
“क्या तुम मशीन हो?”
वह मुझे शक से देखने लगा.
“हो सकता तुम एनीमेशन फिल्मों के शौक़ीन हो. मान लिया तुम्हारा दिमाग उस मूर्ख किसान से कहीं ज्यादा तेज़ है लेकिन फिर भी एक सलाह देना चाहूँगा – किसी के अस्तित्व पर इतने आश्वस्त मत होना या शक मत करना कि अपने से अलग किसी को भी देखो तो उसे एलियन समझो. और फिर एलियन तो तुमने देखे ही नहीं हैं. हाँ मशीन देखीं होंगी. लेकिन क्या तुम जानते हो एक पिल्ले और इंसान में, इन्सान और मशीन में, मशीन और पिल्ले में, समझदार और मूर्ख के दिमाग में – चीखों का अर्थ क्या होता है?”
मेरे दिमाग में चीखों का अर्थ क्या हो सकता है?
मैं यह जान गया कि वह उदास और नशेड़ी था. उसने कहा –
“जिस लड़की की जानकारी तुम चाहते हो उसके बारे में मुझे शक हो रहा है. मुझे ऐसा लगता है जैसे उसे कहीं देखा है. कहाँ देखा है? शायद किसी ने उसके बारे में पहले भी जानकारी चाही हो? शायद वह मेरे सपनों में है. फिर भी तुम्हें इसकी जानकारी चाहिए वह मैं पता करने की कोशिश करूँगा. मैं यही काम करता हूँ. लेकिन किसी को पूरी तरह जान लेना बेहद लम्बा और थकाऊ काम है. वैसे एक सलाह देना चाहूँगा – तुम्हें शिकारियों से मिलना चाहिए. जो लोग पीछा करते हैं उन्हें शिकारी ही कहा जाता है.”
“क्यों?”
“क्योंकि यही तुम्हारी जरूरत है. मैं शिकारी का पता तुम्हें जल्दी ही भेज दूंगा. वह बूढ़ा शिकारी है. तुम एक बेहद जरूरी खोज में शामिल हो गए हो जिसकी जरूरत तुम्हें उस बूढ़े शिकारी तक ले जायेगी – जहाँ तुम्हें पहुंचना चाहिए.”
उसने मुझे मुख्य सड़क के किनारे छोड़ दिया और अपनी काली एसयूवी को ले भागा. मेरे उतरते ही उसने एक्सीलेटर पर पंजा यूँ दबाया था जैसे कोई पकड़ कर बैठा लेगा. क्या यह नशे का असर था? जाने से पहले उसने तीन सिगरेट खत्म की थी. उसने दो बार सुल्फ़ा भरकर और एक सादी सिगरेट सुलगाई थी. ‘गरीब चोर’ से मिलकर अजीब सा महसूस हो रहा था. ऐसा लगता था जैसे उसने मुझे किसी जाल में खींच लिया हो. मेरा सिर भारी हो रहा था. शायद उसके सुल्फे का असर रहा हो. मेरी समझ में नहीं आया – कहाँ जाया जाए? क्या किया जाए? मैं वहीँ खड़े होकर बस का इंतज़ार करने लगा. वह मुझे किसी शिकारी से मिलने के लिए क्यों कह रहा था? – सोचा – क्या तेज़ चलती लड़की का शिकारी से कुछ लेना देना है? काफी देर तक बस नहीं आई लेकिन ‘गरीब चोर’ का सन्देश मेरे फ़ोन पर खड़का. उसमें लिखा था –
28.9620° N, 76.2969° E
हॉट एरिया सेमी एरिड
फ़ोन नंबर और इनकम की कोई डिटेल नहीं
सदा बेनामी सर्व सन्यासी डेरा.
नोट :- 1. उसके सामने धुम्रपान मत करना. 2. शाम को जाना.

अमित ओहलाण का जन्म हरियाणा के रोहतक जिले में गाँव नयाबाँस में हुआ, आरंभिक शिक्षा वहीं हुई। उसके बाद सोनीपत से ग्रेजुएट, जामिया से पत्रकारिता और रचनात्मक लेखन में पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स किया। अमित का पहला उपन्यास ‘मेरा यार मरजिया’ आधार प्रकाशन से प्रकाशित हुआ और अपने मौलिक कथ्य और टेक्निक के लिये चर्चित रहा। आधार प्रकाशन से ही उनका नया उपन्यास ‘सुल्फी यार’ आने वाला है।

लेखन के अलावा फोटोग्राफी और सिनेमा में रुचि है। स्वतंत्र लेखन के साथ किसानी करते हैं।