चलो चाँद पर | आलोक मिश्रा

बाल कविताएँ

1- आम

अट्टा वट्टा सट्टा
आम बीनें खट्टा

भर जाए झोली
तो भागें सरपट्टा

फिर बने चटनी
लेकर सिलबट्टा

संग खाएं रोटी
और मारें रट्टा

अट्टा वट्टा सट्टा
आम बीनें खट्टा।

फ़ोटो: साभार

2- चलो चाँद पर

चलो चाँद पर करें चढ़ाई
बैठ वहाँ पर करें पढ़ाई
सूरज पर भी धावा बोलें
गर्मी उसकी जरा टटोलें
फिर बादल पर झूला झूलें
कूद कूद कर तारे छू लें
चलें हवा संग दूर देश में
घूमें जब तक रहें जोश में
जब थक जाएँ घर को आएँ
खा पीकर बिस्तर पर जाएँ ।

  1. नन्हीं चींटी

नन्हीं चींटी जरा बताना
मुझको अपना हाल ठिकाना
कहाँ से आती कहाँ को जाती
दिन भर ढूँढो क्यों तुम खाना
छोटा सा तो पेट तुम्हारा
उस पर खाती हो ढेर सारा
मीठे से क्यों जी नहीं भरता
कैसे हो पाता है पचाना
नन्हीं चींटी जरा बताना
इतने घर में लोग तुम्हारे
मिलकर करते काम हो सारे
आलस तुममें तनिक नहीं है
करती क्यों नहीं कोई बहाना
नन्हीं चींटी जरा बताना
दादी कहती तुम हो ज्ञानी
अंडे ढोओ उस दिन यानी
बारिश होगी खूब सुहानी
ये सब तुमने कैसे जाना
नन्हीं चींटी जरा बताना।

फ़ोटो: साभार

4. तितली

पापा मैं तितली बन जाऊँ
फूलों पर जाकर मंडराऊँ
खुशबु से जब जी भर जाए
आपके काँधे आ सुस्ताऊँ
पापा मैं तितली बन जाऊँ

पीले नीले हरे नारंगी
पंख मेरे होंगे सतरंगी
माँ मुझको पहचान न पाए
उड़ उड़ करके खूब छकाऊँ
पापा मैं तितली बन जाऊँ

कोई पकड़े तो आप छुड़ाना
संग संग मेरे बाग में आना
किसी जीव को तंग करो मत
तुम समझाओ मैं समझाऊँ
पापा मैं तितली बन जाऊँ.

  1. अनोखी बंदूक

एक बंदूक बनाऊं ऐसा
निकले जिससे प्रेम की गोली
जिसको लगे वही फिर बोले
एक दूजे से मीठी बोली
फिर न होगी कहीं लड़ाई
सभी करेंगे सबकी भलाई
हम बच्चों संग खेलेंगे सब
गुल्ली-डंडा, छुपन-छुपाई.

  1. चलो

चलो चाँद पर करें चढ़ाई
बैठ वहाँ पर करें पढ़ाई
सूरज पर भी धावा बोलें
गर्मी उसकी जरा टटोलें
फिर बादल पर झूला झूलें
कूद कूद कर तारे छू लें
चलें हवा संग दूर देश में
घूमें जब तक रहें जोश में
जब थक जाएँ घर को आएँ
खा पीकर बिस्तर पर जाएँ.

  1. पेट दर्द

दर्द पेट में बना हुआ है
लगता है जी खट्टा
सीने में भी जलन मची है
सोनू लगा रहा रट्टा
मम्मी बोली- ठीक है बेटा
रहो आज बिस्तर पर
वैसे आज पाठशाला में
खेल दिखायेगा जादूगर
सुनकर धीरे-धीरे सोनू
फिर होने लगा तैयार
बोला- पाठशाला मैं जाऊँगा
है तबियत में सुधार।

आलोक कुमार मिश्रा दिल्ली के सरकारी विद्यालय में शिक्षक (पी जी टी, राजनीतिक विज्ञान) के पद पर कार्यरत हैं। बोधि प्रकाशन से कविता संग्रह ‘मैं सीखता हूँ बच्चों से जीवन की भाषा’ प्रकाशित।  9818455879; alokkumardu@gmail.com

पानी बाबा बादल बन – प्रमोद पाठक

बाल कविताएँ

पानी उतरा टीन पर

Water droplets
Photo: Omesh

पानी उतरा टीन पर
फिर कूदा जमीन पर

पत्ती और फूल पर
खूब-खूब झूलकर

कोहरे में हवाओं में
नाचकर झूमकर

छुप गया खो गया
मिट्टी को चूमकर


पानी बाबा

Rain
Photo: Omesh

पानी बाबा बादल बन
जा बैठा आसमान में
कोहरे की दाढी़ उसकी
उड़ रही हवाओं में

अँधेरे का छाता ताने
बैठकर पहाड़ों में
बौछारों का झमझम बाजा
झमझम बजा झाड़ों में

फुहारों की लाठी लिए
घूमा नदी गाँवों में
भर गई थकान खूब
फुहारों के पाँवों में

टिप टिप टिप गाया गान
बागों में बगीचों में
ओस की चदरिया तान
सो गया वो खेतों में


बुनकर हैं बया जी

Bunkar Baya
Photo: Kishan Meena

दया जी दया जी
देखो बया जी

देखो देखो बिट्टी
घोंसले में मिट्टी

सूखी-सूखी घास
बहुत ही खास

लाई चुन चुनकर
बया जी हैं बुनकर

बया जी का हौंसला
बुना लम्बा घोंसला

बया जी ने चुनकर
अण्डे दिए गिनकर

अण्डा फूट गया जी
चूजा निकला नया जी

दया जी दया जी
चहक रही बया जी


चोंच

Chonch

Photo: Pompi Bera

चिड़िया की चोंच
चूजे की चोंच
चूजे की चोंच में
चिड़िया की चोंच

चुग्गा लाए
चिड़िया की चोंच
चुग्गा खाए
चूजे की चोंच


प्रमोद बच्‍चों व बड़ों दोनों के लिए लि‍खते हैं। उनकी लि‍खी बच्‍चों की कहानियों की कुछ किताबें गैर लाभकारी संस्‍था ‘रूम टू रीड’ द्वारा प्रकाशित हो चुकी हैं। और कुछ कविताएँ व कहानियाँ बच्‍चों की प्रत्रिका चकमक, साइकिल व प्‍लूटो में। उनकी कविताएँ अहा जिन्‍दगी, डेली न्‍यूज, माटी के कविता वि‍शेषांक, पूर्वग्रह, बनास जन आदि पत्र-पत्रिकाओं में तथा वेब पत्रिका प्रतिलिपी, समालोचन व सदानीरा में प्रकाशित हो चुकी हैं। वे बतौर फ्री लांसर बच्‍चों के साथ रचनात्‍मकता पर तथा शिक्षकों के साथ पैडागॉजी पर कार्यशालाएँ करते हैं। 2016-19 तक दिगन्‍तर, जयपुर से निकलने वाली शिक्षा की महत्‍वपूर्ण पत्रिका ‘शिक्षा विमर्श’ के संपादक रह चुके हैं.
सम्पर्क : 9460986289; pathak.pramod@gmail.com
27 ए, एकता पथ, (सुरभि लोहा उद्योग के सामने), श्रीजी नगर, दुर्गापुरा, जयपुर, 302018, राजस्‍थान।