कोरोना का पेंटिंग काल| चरण सिंह पथिक

लॉक-डाउन के इस कोरोना युग में सृजनधर्मियों की सृजनता अलग-अलग रूपों में सामने आ रही है। कहीं लोकगीतों के माध्यम से तो कहीं कविता-गीत-गजल और कहानियों तथा डायरी के माध्यम से हम सभी के रूबरू है। उपन्यास भी इस हाहाकार को लेकर लिखे जा रहे होंगे।
प्रीती कौशल इस युग को अपनी पेंटिंगों के माध्यम से अभिव्यक्त कर रही है ।प्रीति कौशल जयपुर के कानोडिया कॉलेज में पेंटिंग पढ़ाती है । प्रीति की कोरोना को लेकर कई पेंटिंग निकट भविष्य में हम सब के सामने होंगी। बहरहाल प्रीति कौशल को बहुत-बहुत बधाई। रचती रहो। कोरोना से बचती रहो।

कहाँ पहुँचेंगे..? | विक्रम सिंह मीणा

ये तो पहुँच ही जाएँगे देर सवेर, पैरों में छाले और पीठ पर मार के निशान लेकर।
मुझे बस ये जानना है कि हम कहाँ पहुँचेंगे..? – गौरव सौलंकी

कहाँ पहुँचेंगे..? |  विक्रम सिंह मीणा
कहाँ पहुँचेंगे -विक्रम सिंह मीणा