तुम्हें डर है | गोरख पांडेय

“ हज़ार साल पुराना है उनका गुस्सा
हज़ार साल पुरानी है उनकी नफ़रत
मैं तो सिर्फ़
उनके बिखरे हुए शब्दों को
लय और तुक के साथ लौटा रहा हूँ
मगर तुम्हें डर है कि
आग भड़का रहा हूँ l
~
गोरख पांडेय

वे डरते हैं
तमाम धन-दौलत
गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद
किस बात से डरते है वे ?

वे डरते हैं
कि एक दिन
गरीब लोग और निहत्थे लोग
उनसे डरना छोड़ देंगे ।
~
गोरख पांडेय