लॉक डाउन | चरण सिंह ‘पथिक’

तुझपे तो असर है दरिया की रवानी का ।
मेरे सर इल्जाम है इश्क-बयानी का ।।

दिन हैं सहमे-सहमे शामें भी उदास हैं
पर रात आई तो खत आया रात-रानी का ।

ख्बाव में ही सही हम तुमसे पूछेंगे जरूर
दर्द कम हुआ है या मर्ज बढ़ गया दीवानी का ।

गरूर ना हुश्न पै करियो ना कातिल अदाओं पै
जिंदगानी तो फकत बुलबुला है पानी का ।

ये मुमकिन नहीं कि तू भुला दे पथिक को
एक नया किरदार है तू नई कहानी का ।

भैरोघाट से

पेंटिंग पथिक की वाल से , साभार

कोरोना का पेंटिंग काल| चरण सिंह पथिक

लॉक-डाउन के इस कोरोना युग में सृजनधर्मियों की सृजनता अलग-अलग रूपों में सामने आ रही है। कहीं लोकगीतों के माध्यम से तो कहीं कविता-गीत-गजल और कहानियों तथा डायरी के माध्यम से हम सभी के रूबरू है। उपन्यास भी इस हाहाकार को लेकर लिखे जा रहे होंगे।
प्रीती कौशल इस युग को अपनी पेंटिंगों के माध्यम से अभिव्यक्त कर रही है ।प्रीति कौशल जयपुर के कानोडिया कॉलेज में पेंटिंग पढ़ाती है । प्रीति की कोरोना को लेकर कई पेंटिंग निकट भविष्य में हम सब के सामने होंगी। बहरहाल प्रीति कौशल को बहुत-बहुत बधाई। रचती रहो। कोरोना से बचती रहो।