खोती जाती औरत | प्रमोद बेड़िया

सुबह से खोई हुई औरत
खोज रहा हूँ
रात तो बग़ल में ही सोयी थी
सुबह भी थी पता नहीं
जरा आ रहीं हूँ कह कर
गई या नहीं
लेकिन मिल
तो नहीं रही है ।

मैंने बर्तनों में खोजा
वे आवाज़ करते जा रहे थे
जैसे कह रहे थे नहीं बताएँगे
कहाँ छुपाया है उसे लेकिन
वह हमारे पास है ।

मैंने सोचा ये मज़ाक़ कर रहे हैं
तो नल को चलाते ही वह कुछ बोली
कि देखो
वह पानी-सी बह रही है
सहेज लो ,वरना बिखर जाएगी
बह जाएगी ,
कोशिश तो बहुत की
मैंने ,लेकिन वह बहती गई
बिखरती गई
लगा यह झूठ कह रही है ।

लगा बिस्तर से ही पूछूँ ,क्योंकि
अंतिम बार वहीं देखा था
तो बिस्तर पर
हाथ लगाते ही वह सिहरा ,
ज्यों वह
औरत जवानी में सिहरती थी
कि मैं काँपने लगा ,
यह क्या हुआ
मुझे कि मैं बिस्तर से ही लिपटने
जा रहा था
कि पत्ते गिरने की
आवाज़ आई ।

मैं बाहर आया तो सूखे पत्ते हाथ
हिला कर मुझे बुला रहे थे
मैं चकित था कि आज यह हो क्या रहा है
वह औरत तो कहीं नहीं है
और सब मुझे ही अपराधी समझते
जा रहें हैं
जैसे मैंने उसका
अपहरण कर लिया है और
मैं ही खोज रहा हूँ
कि पत्ते बोले
अब जो हवा का झोंका आएगा
वह तुम्हे छू कर
उसका पता दे जाएगा ।

लेकिन
संभाल कर रखना
इस बार ।

पेंटिंग-अवधेश बाजपेई
पेंटिंग-अवधेश बाजपेई

( पहल-१११ में छपी )

औरतों का फायदा | प्रमोद बेड़िया

मुझे इस इलाके की औरतें नहीं भाती
निचुड़ी-चुपसी-हड़ीली
कुछ समझ में ही नहीं आता
कि औरत है
शरीर पर मास तो है ही नहीं
हड्डियों की ही बनी हो जैसे

ओह,मैं बताना ही भूल गया
जिस इलाके के बारे में कह रहा हूँ
वह पहले इनका ही था
याने मजूर,रिक्शा चालक,ठेला चालक
दिहाड़ी मजदूर इत्यादि
करेले पर नीमचढ़ा यह कि
सरकार को लगा कि इन्हें
दवा से ज्यादा दारू की जरूरत है
तो सरकारी दारू का ठेका भी खोल दिया

होना तो वही था,जो हुआ है
साले सारे मर्द लतखोर हो कर नपुंसक हो गए
औरतों को पीटते तो थे ही,फिर घोड़ी समझ
चढ़ जाते,सुबह उठ नहीं पाते

अब औरत तो औरत,मेरी हो,आपकी हो
या उसकी हो,बिचारी को तो चूल्हा भी जलाना पड़े
भात भी सिझाना पड़े,लेकिन चावल कहाँ से आए
तो आधी जगहों में,जो हम जैसे लोगों ने मकान बनवा लिए थे
उनके यहाँ चौका-बासन करे,झाड़ु-बुहारू करे
मरद से आधे वेतन में काम करे और चुल्हे पर हाँड़ी चढ़े
भतार और रुलते बच्चों क अधपेट खाना मिले

इन औरतों के बारे में ही उपर कहा है,जनाब
आप ही बताएँ,ऐसी औरतों को क्या तो खाए
क्या पिए,क्या बिछाए,उपर से गंदी इतनी
कि आप भी गंधा जाएंगे-क्या फायदा

फायदा तो इनकी आधी बची जमीन लेने में है ॥