बेर्टोल्ट ब्रेख्त की तीन कविताएँ | अनुवाद- मोहन थपलियाल

1.

1940

मेरा छोटा लड़का मुझसे पूछता है : क्या मैं गणित सीखूं?
क्या फायदा है, मैं कहने को होता हूं
कि रोटी के दो कौर एक से अधिक होते है
यह तुम एक दिन जान ही लोगे।

मेर छोट लड़का मुझसे पूछता है :
क्या मैं फ्रांसीसी सीखू?
क्या फायदा है, मैं कहने को होता हूं
यह देश नेस्तनाबूद होने को है।
और यदि तुम अपने पेट को हाथों से मसलते हुए
कराह भरो, बिना तकलीफ के झट समझ लोगे।

मेरा छोटा लड़का मुझसे पूछता है : क्या मैं इतिहास पढ़ूं?
क्या फायदा है, मैं कहने को होता हूं
अपने सिर को जमीन पर धंसाए रखना सीखो
तब शायद तुम जिंदा रह सको।

2.

यह रात है

विवाहित जोड़े
बिस्तरों पर लेटे हैं
जवान औरतें
अनाथों को जन्म देगी।

3.

युद्ध जो आ रहा है

युद्ध जो आ रहा है
पहला युद्ध नही है।
इससे पहले भी युद्ध हुए थे
पिछला युद्ध जब खत्म हुआ था
तब कुछ विजेता बने और कुछ विजित
विजितों के बीच आम आदमी भूखा मरा
विजेताओं के बीच भी मरा वह भूखा ही।

बेर्टोल्ट ब्रेख्त
(महान जर्मन चिंतक, कवि और नाटककार)

अनुवाद- मोहन थपलियाल (हिंदी कवि और कथाकार)